स्टॉक मार्केटिंग विज्ञापन से 54.30 लाख रुपये की साइबर ठगी, व्हाट्सएप लिंक व फर्जी ग्रुप के जरिए ट्रेडिंग कंपनी बनकर दिया झांसा

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रुद्रपुर, संवाददाता

हल्द्वानी निवासी व्यक्ति ने स्टॉक मार्केटिंग के विज्ञापन पर क्लिक किया और 54 लाख रुपये की साइबर ठगी हो गई। उनके व्हाट्सएप पर स्टॉक मार्केटिंग विज्ञापन का लिंक आया था। मोटा मुनाफा के लालच ने लाखों का नुकसान करा दिया। पीड़ित की तहरीर पर साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन कुमाऊँ परिक्षेत्र रुद्रपुर में मुकदमा दर्ज हो गया है।

जानकारी के मुताबिक, हल्द्वानी के नवाबी रोड के रहने वाले गंगा सिंह परिहार पुत्र कुशल सिंह परिहार ने तहरीर में बताया कि 13 जून 2025 में व्हाट्सएप पर स्टॉक मार्केटिंग का विज्ञापन मिला। लिंक पर क्लिक करने के बाद अज्ञात व्यक्तियों ने खुद को कथित अभिनंदन स्टॉक ब्रॉकिंग प्राईवेट लिमिटेड का प्रतिनिधि बताते हुए उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ लिया। इस ग्रुप में रोजाना नकली मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा किए जाते थे, जिससे पीड़ित को भरोसा हो गया और उन्होंने ट्रेडिंग अकाउंट खोल लिया। साइबर अपराधियों ने शुरुआत में 50 हजार रुपये निवेश कराने के बाद लगातार बड़ी रकम जमा कराने के लिए लालच दिया। 10 जुलाई से 12 अगस्त 2025 के बीच पीड़ित ने अलग-अलग बैंकों के खातों में कुल 54.30 लाख रुपये ट्रांसफर किए। रकम विभिन्न बैंकों के खातों में भेजी गई। कुछ समय बाद जब परिहार ने मार्केटिंग के बारे में अन्य जानकारी लेने के लिए ग्रुप के सदस्यों से संपर्क करना चाहा तो सभी नंबर बंद मिले और उन्हें ठगी का अहसास हुआ। प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों के उपयोग किए गए बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच की जा रही है। जनता से अपील है अज्ञात लिंक, व्हाट्सएप ग्रुप या सोशल मीडिया विज्ञापनों पर भरोसा न करें। अगर किसी संदिग्ध लिंक या कॉल की जानकारी मिले तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में संपर्क करें।

इनसेट कोड-

सोशल मीडिया पर विज्ञापन के जरिये स्टॉक मार्केटिंग का प्रलोभन और साइबर ठगी

आज के समय में मोटा मुनाफे का लालच लोगों को साइबर ठगी के दलदल में ढकेल रहा है। ऑनलाइन ठगी का नया हथकंडा अब स्टॉक मार्केटिंग और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर तेजी से फैल रहा है। साइबर ठग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप पर ऐसे विज्ञापन चला रहे हैं, जिनमें निवेश पर शॉर्ट टर्म में मोटा मुनाफा देने का लालच दिखाया जाता है। ठग सबसे पहले व्हाट्सएप ग्रुप या टेलीग्राम चैनल में जोड़कर विश्वास बनाने का काम करते हैं। वहां नकली प्रोफिट के स्क्रीनशॉट और झूठी कहानियां शेयर की जाती हैं ताकि लोग निवेश करने के लिए प्रेरित हों। शुरुआत में कम रकम पर छोटा लाभ दिखाकर जाल मजबूत किया जाता है और फिर धीरे-धीरे लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं। साइबर गिरोह नकली वेबसाइट और मोबाइल एप का सहारा लेते हैं, जो बिल्कुल असली स्टॉक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसी दिखती हैं। इनमें डाले गए पैसे कुछ समय के लिए वर्चुअल प्रॉफिट दिखाते हैं लेकिन असल में रकम सीधे गिरोह के खातों में चली जाती है।


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