60 लाख की साइबर ठगी का मास्टरमाइंड गिरफ्तार — रिटायर्ड अर्द्धसैनिक को “डिजिटल अरेस्ट” कर लूटा था ठग

देहरादून/रुद्रपुर। उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर थाना पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 60 लाख रुपये की साइबर ठगी के मुख्य आरोपी को हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित ने खुद को सीबीआई और महाराष्ट्र साइबर विभाग का अधिकारी बताकर अर्द्धसैनिक बल से सेवानिवृत्त व्यक्ति को “डिजिटली अरेस्ट” कर ठगा था।
एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि नैनीताल जिले के बेतालघाट निवासी और पैरामिलिट्री से रिटायर्ड खीम सिंह ने जुलाई 2025 में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, अज्ञात व्यक्तियों ने उन्हें फोन कर बताया कि उनके बैंक खाते में मनी लांड्रिंग के ₹68 करोड़ का लेनदेन हुआ है। इसके बाद ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए उनका डिजिटल सत्यापन करने के बहाने व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” कर लिया और 16 दिनों में विभिन्न खातों में ₹60 लाख जमा करा लिए।
मामले की जांच साइबर थाना प्रभारी रुद्रपुर अरुण कुमार के नेतृत्व में शुरू हुई। पुलिस ने ठगों द्वारा प्रयुक्त बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और व्हाट्सएप अकाउंट्स की तकनीकी जांच करते हुए मेटा कंपनी, बैंक और टेलीकॉम सर्विस प्रदाताओं से डेटा प्राप्त किया। तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण में मुख्य आरोपी कमल सिंह पुत्र महेंद्र सिंह, निवासी गोहा रजियावास जेवाजा, अजमेर (राजस्थान) का नाम सामने आया।
पुलिस ने उसकी तलाश में कई स्थानों पर दबिश दी। इसी बीच उसकी लोकेशन हरियाणा में मिली। इसके बाद साइबर थाना प्रभारी अरुण कुमार के नेतृत्व में टीम — एएसआई सत्येंद्र गंगोला, हेड कांस्टेबल सोनू पांडे, मनोज कुमार और कांस्टेबल रवि बोरा — हरियाणा पहुंची। गुरुवार देर रात पुलिस ने उसे गुरुग्राम के न्यू कॉलोनी थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने उसके पास से एक मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड बरामद किए हैं। आरोपित को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। एसएसपी एसटीएफ ने कहा कि यह गिरफ्तारी डिजिटल ठगी के बढ़ते मामलों के बीच एक अहम सफलता है और जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों तक भी पहुंच बना ली जाएगी।
