लाइनमैन की करंट लगने से मौत, परिजनों का हंगामा, जांच कमेटी गठित करने की तैयारी

रुद्रपुर। कोतवाली क्षेत्र के शिमला पिस्तौर में रविवार रात करंट लगने से लाइनमैन की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे परिजनों और ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया और ऊर्जा निगम के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया। मृतक के परिजनों ने इसे साजिशन हत्या करार देते हुए कार्रवाई की मांग की।
ग्राम शिमला पिस्तौर निवासी 48 वर्षीय शिव कुमार ऊर्जा निगम के किच्छा सब डिविजन में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से लाइनमैन के रूप में कार्यरत थे। रविवार रात उन्हें मलसी रोड स्थित निर्माणाधीन सत्यम मेंटल कंपनी के पास लाइन में फॉल्ट की सूचना मिली थी। बेटे नरेश के अनुसार, उन्होंने कच्ची खमरिया स्थित बिजली घर से शटडाउन लिया था और मौके पर पहुंचकर पोल पर चढ़े ही थे कि तार में करंट होने के चलते उन्हें जोरदार झटका लगा और वह नीचे आ गिरे। सिर पर गंभीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
परिजनों का आरोप है कि जेई को कई बार सूचना देने के बावजूद वह मौके पर नहीं पहुंचे। हादसे को लेकर शिव कुमार के बेटे ने इसे एक सोची-समझी साजिश बताया। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन मौके पर जुट गए और आक्रोश जताते हुए शव को उठाने से मना कर दिया।
स्थिति बिगड़ती देख एसएसआई ललित मोहन रावल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, एसडीओ डीसी गुरुरानी भी पहुंचे और परिजनों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। देर रात शव को मोर्चरी भिजवाया गया। सोमवार सुबह एसडीओ मृतक के घर पहुंचे और परिजनों को आर्थिक मदद और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।
मृतक के परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे और दो बेटियां हैं। सांसद प्रतिनिधि विपिन जल्होत्रा, ललित बिष्ट समेत कई स्थानीय लोग परिजनों से मिले और शोक जताया।
इस मामले में अधिशासी अभियंता संजय मिश्रा ने बताया कि एसडीओ और जेई की रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि लाइनमैन ने जिस लाइन का शटडाउन लिया, वह अलग थी, जबकि कार्य दूसरी लाइन पर किया जा रहा था। रिपोर्ट अधीक्षण अभियंता को सौंप दी गई है और जल्द ही सर्किल कार्यालय की ओर से जांच कमेटी गठित की जाएगी। जांच के बाद ही असल स्थिति सामने आ पाएगी।
एक ओर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है, वहीं अब सभी की निगाहें ऊर्जा निगम की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय हो सके कि यह हादसा था या लापरवाही की कीमत एक जान ने चुकाई।
