हाईकोर्ट: भ्रमित सहमति से बने यौन संबंध को माना जाएगा दुष्कर्म

देहरादून की एक युवती से शादी और संबंध बनाने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने साफ किया है कि यदि महिला को भ्रमित कर सहमति ली गई है तो यह सहमति मान्य नहीं होगी और मामला बलात्कार का ही बनेगा।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित ने सार्थक वर्मा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब कोई पुरुष अपनी पूर्व शादी छुपाकर दूसरी महिला से विवाह करता है और उसी आधार पर यौन संबंध बनाता है, तो महिला की सहमति वास्तविक नहीं होती। यह सहमति “भ्रमित सहमति” मानी जाएगी, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 375 की चौथी परिभाषा के तहत बलात्कार की श्रेणी में आती है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट और अन्य उच्च न्यायालयों के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में गंभीर अपराध के पर्याप्त साक्ष्य हैं। इस आधार पर सीजेएम देहरादून का आदेश सही माना गया और अभियुक्त की राहत याचिका खारिज कर दी गई।