सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला गरमाया: निलंबन-जांच के बावजूद कांग्रेस हमलावर, सरकार पर पुलिस-भू माफिया गठजोड़ का आरोप, न्याय दिलाने की मांग तेज
काशीपुर में किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या का मामला लगातार गरमाता जा रहा है। मजिस्ट्रेट जांच के आदेश, पुलिस कर्मियों के निलंबन और पैगा चौकी स्टाफ के लाइन हाजिर होने के बावजूद विपक्ष सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय की मांग को और तेज कर दिया है।
बीती 10-11 जनवरी की रात काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह ने हल्द्वानी के एक होटल में आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले किसान ने एक वीडियो बनाया और सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उसने वित्तीय धोखाधड़ी से परेशान होने और कुछ प्रॉपर्टी डीलरों व उधम सिंह नगर के पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। आईटीआई थाने के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी उत्पीड़न का आरोप सामने आया, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए। जांच की जिम्मेदारी कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को सौंपी गई है। वहीं उधम सिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने कार्रवाई करते हुए आईटीआई थाने के एसओ कुंदन सिंह रौतेला और उपनिरीक्षक प्रकाश बिष्ट को निलंबित कर दिया, जबकि पैगा पुलिस चौकी के पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर किया गया।
इधर, कांग्रेस इस पूरे मामले को लेकर सरकार और पुलिस पर लगातार सवाल उठा रही है। इसी क्रम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या पैगा गांव पहुंचे और मृतक किसान के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी।
गणेश गोदियाल (प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस):
“कांग्रेस पूरी तरह से सुखवंत सिंह के परिवार के साथ खड़ी है। न्याय दिलाने के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा। मुख्यमंत्री को यह भी बताना चाहिए कि यदि उनके चहेते अधिकारी इस तरह के मामलों में लिप्त हैं तो प्रदेश कैसे आगे बढ़ेगा।”
यशपाल आर्या (नेता प्रतिपक्ष):
“यह राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि न्याय की लड़ाई है। वीडियो में किसान की पीड़ा साफ दिखती है। पुलिस और भू-माफियाओं के गठजोड़ ने उसे प्रताड़ित किया, जिसके चलते उसने आत्महत्या की। कांग्रेस न्याय दिलाकर रहेगी।”
फिलहाल पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच जारी है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है।
