“विदेशी नौकरी का लालच, म्यामांर में बंधक बने युवा—K.K पार्क में साइबर ठगी करवाने वाले भारतीय एजेंटों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, उत्तराखण्ड पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा।”

रुद्रपुर। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन कुमाऊँ परिक्षेत्र रुद्रपुर ने एक बड़ा खुलासा करते हुए म्यामांर (वर्मा) के कुख्यात K.K पार्क में भारतीय युवकों को बंधक बनाकर साइबर ठगी करवाने वाले अंतरराष्ट्रीय गैंग का पर्दाफाश किया है। भारत सरकार और उत्तराखण्ड पुलिस के संयुक्त अभियान के बाद ऊधम सिंह नगर, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के 09 युवकों को दिल्ली से सुरक्षित लाकर उनके परिजनों को सौंपा गया। यह सभी युवक रोजगार के नाम पर भारतीय एजेंटों द्वारा ठगे गए थे और टूरिस्ट वीज़ा पर थाईलैंड भेजने के बाद उन्हें अवैध रूप से म्यामांर में बंधक बनाकर जबरन साइबर अपराध में लगाया गया था।
उपनिरीक्षक शंकर सिंह रावत द्वारा युवकों से की गई विस्तृत पूछताछ में एक संगठित नेटवर्क का सनसनीखेज खुलासा हुआ। पूछताछ में सामने आया कि जसपुर, काशीपुर, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के युवाओं को टेलीग्राम, व्हाट्सएप और व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से नौकरी का लालच दिया गया। भारतीय एजेंटों ने 40 हजार से लेकर 2 लाख रुपये तक लेकर उन्हें बैंकॉक भेजा। एयर टिकट, वीज़ा और कागजात व्हाट्सएप पर ही भेजे जाते थे।
बैंकॉक पहुंचने के बाद युवकों को अलग-अलग वाहनों से, जंगलों और नदी-नालों को पैदल पार करवाते हुए अवैध रूप से म्यामांर के मयावाडी स्थित K.K पार्क पहुंचाया गया। यहां चीनी गिरोह द्वारा संचालित अवैध कॉल सेंटरों में उन्हें बंधक बनाकर साइबर अपराध करने की ट्रेनिंग दी जाती थी। उनसे अमेरिकी नागरिकों के नंबर ट्रेस करना, डेटिंग वेबसाइट के माध्यम से लोगों के संपर्क जुटाना तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए विभिन्न एप्लिकेशन और वेबसाइटों के संचालन का कार्य करवाया जाता था।
पीड़ित युवकों ने पूछताछ में चौंकाने वाली बातें बताईं—
जसपुर निवासी सुनील कुमार और उसका भाई अशोक, काशीपुर के नीरव चौधरी, प्रदीप, मुंबई निवासी धनंजय सहित कई अन्य एजेंट युवकों को नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजते थे।
सुनील कुमार ने कई युवकों से 70,000 से 2,00,000 रुपये तक लिए, जबकि काशीपुर के नीरव चौधरी को गुजरात पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार किया हुआ है।
पीड़ितों ने बताया कि उनके साथ पाकिस्तान, वियतनाम, बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों के युवक भी वहां बंधक बनाकर रखे गए थे।
युवकों को धमकाकर 10-12 घंटे काम कराया जाता था और मोबाइल-इंटरनेट की सख्त निगरानी रहती थी।
डेटिंग वेबसाइटों पर ठगी करवाना— मुख्य काम
कई युवकों ने बताया कि उन्हें Asian Dating, International Cupid, Japan Cupid, Thai Cupid, Philippine Cupid जैसी साइटों पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर विदेशी नागरिकों से संपर्क स्थापित करने का काम दिया जाता था। उनसे नंबर लेकर आगे बड़े गैंग द्वारा साइबर अपराध किया जाता था।
बड़ी साजिश का खुलासा
जांच में पाया गया कि एजेंट पूर्व नियोजित आपराधिक षड्यंत्र के तहत संगठित रूप से युवकों को विदेश भेज रहे थे। इनकी मिलीभगत चीनी कंपनियों के गैंग से थी, जो K.K पार्क में बड़े पैमाने पर साइबर फ्रॉड चलाते हैं।
उपनिरीक्षक रावत ने तहरीर में उल्लेख किया कि यह अपराध BNS 2023 की धारा 318(4), 127(7), 111(4), 143(3), 61(2), 3(5) तथा आईटी एक्ट की धारा 66(डी), 84(बी) के अंतर्गत दंडनीय है।
अधिक पीड़ितों को भेजने की साजिश भी सामने
तहरीर में यह भी खुलासा हुआ कि सुनील, पिंकी और अन्य एजेंटों द्वारा उत्तराखण्ड की कुमारी सपना और गौरव सहित कई और लोगों को भी जल्द ही थाईलैंड होते हुए म्यामांर भेजा जाना था। पुलिस को इनकी गोपनीय जानकारी मिल चुकी है।
साइबर पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
पूरी जांच रिपोर्ट के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस ने संबंधित आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। आगे की विवेचना शुरू कर दी गई है, ताकि इस अंतरराष्ट्रीय साइबर ट्रैफिकिंग रैकेट के बाकी चेहरे भी बेनकाब किए जा सकें।
यह मामला रोजगार के नाम पर युवाओं की बड़े पैमाने पर होने वाली ठगी और उन्हें साइबर अपराध में धकेलने की अंतरराष्ट्रीय साजिश का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। पुलिस ने युवाओं और परिजनों से अपील की है कि बिना जांच-परख किसी भी विदेशी नौकरी के झांसे में न पड़ें।
